कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए क्यों दिग्विजय सिंह का पलड़ा भारी है?

अशोक गेहलोत के साथ दिग्विजय सिंह

न्यूज़ रिवेटिंग

नई दिल्ली, सितम्बर 23

कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे अशोक गहलोत का अगला कदम सबसे पुरानी पार्टी में हो रहे चुनाव की दिशा तय करेगा।

गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद बनाये रखने के लिए दृढ़ हैं, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पार्टी में एक व्यक्ति-एक-पद सिद्धांत का पालन करने का स्पष्ट संकेत दिया है। दिए गए फॉर्मूले में गहलोत को मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा। लेकिन उन्हें इस बात का दुःख नहीं है; वे चिंतित है तो सिर्फ इसलिए कि वे अपने प्रतिद्वंद्वी सचिन पायलट को किसी भी कीमत में मुख़्यमंत्री की कुर्सी नहीं देना चाहते हैं।

गहलोत ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है और कथित तौर पर अपने कट्टर विरोधी सचिन पायलट को राजस्थान के अगले मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों ने न्यूज रिवेटिंग को बताया कि गहलोत की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ बैठक उसी लाइन पर केंद्रित थी। गुरुवार को गहलोत ने कांग्रेस की कमान संभालने के राहुल गांधी से फिर आग्रह किया और उनसे केरल जाकर मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने कांग्रेस के अध्यक्ष पद संभालने के लिए अपनी शर्तों पर भी चर्चा की।

यदि आगे कोई अड़चन नहीं आता है तो गहलोत 26 सितंबर को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उन्हें सुझाव दिया गया है कि सोमवार शुभ दिन है और उन्हें इसी दिन नामांकन भरना चाहिए। नामांकन प्रक्रिया 24 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर को समाप्त होगी।

शशि थरूर की मैदान में उतरने से आखिरी वक्त में समीकरण बदल सकता है। चूंकि थरूर पार्टी में स्वाभाविक पसंद नहीं रहे हैं, इसलिए दिग्विजय सिंह एक विकल्प के रूप में उभर सकते हैं यदि गहलोत अपनी योजना विफल हो जाते है।

पार्टी सूत्रों ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि दिग्विजय थरूर के खिलाफ गहलोत की तरह ही प्रबल उम्मीदवार होंगे क्योंकि दोनों राहुल के साथ एक मौन सहमति के बाद चुनाव मैदान में उतरना चाहेंगे। दोनों “वफादारी” में भी दोनों साथ हैं। वास्तव में इस महत्वपूर्ण समय में दिग्विजय सिंह राहुल के आंतरिक सलाहकार हैं और उनकी महत्वाकांक्षी भारत जोड़ो यात्रा की कमान संभाले हुए हैं।

नए समीकरण में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को एक फायदा है। गहलोत जहां राजस्थान की राजनीति पर समझौता नहीं कर रहे हैं, वहीं दिग्विजय बिना किसी पूर्व शर्त के आते हैं।

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